हालांकि इन का इस्तेमाल कितना और क ब तक करना चाहिए, इस पर अभी रिसर्च जारी है. अपनी रिसर्च के आधार पर इसराइल के प्रोफ़ेसर एरन ए लिनाव का कहना है कि हर इंसान को प्रोबायोटिक्स फ़ायदा ही करे, ये ज़रूरी नहीं. उन्होंने 25 लोगों को दो ग्रुप में बांट कर ये रिसर्च की थी. एक वो ग्रुप था जिनकी बड़ी आंत में ऐसे माइक्रोबायोम मौजूद थे जो प्रोबायोटिक्स के सा थ तालमेल बैठा सकते थे. ऐसे लोगों को प्रोबायोटिक्स लेने का फ़ायदा हुआ. लेकिन दूस रा वो ग्रुप था जिनकी बड़ी आंत में प्रोबायोटिक्स के सा थ तालमेल बैठाने वाले जीवा णु नहीं थे. ऐसे लोगों को इसका कोई फ़ायदा नहीं हुआ. हा लांकि इस रिसर्च का सैम् पल साइज़ बहुत छोटा था. सटीक जवाब पाने के लिए ज़्यादा बड़े सैम्पल साइज़ पर रिसर्च की जा रही है. इसके बाद ये भी सुनिश्चि त किया जा सकेगा कि किस शख़्स को कौन से प्रोबायोटिक्स लेने चाहिए. सेहतमंद ज़िंदगी जीने में शरीर के भीतर पलने वाले जीवाणुओं का बहुत बड़ा और अहम रोल होता है. बच्चे की पैदाइश के चंद हफ़्तों बाद ही तय हो जा ता है कि बच्चा कितना सेहतमंद रहने वाला है. लिंडसे हाल क्वाडरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ बा...