वहीं खरगा पुर राज परिवा र के सदस्य और भाजपा नेता हरदेव सिंह कहते हैं कि जनता में अपने परिवार की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए उनके परिवार का सामूहिक निर्णय है कि वो शरा ब को हाथ नहीं ल गाते. वो बताते हैं, "सालों पुरानी ये परंपरा आज की युवा पीढ़ी भी कायम रखे हुए है. हम नहीं चाहते कि लोग हमें पुराने ज़माने के राजा ओं की भा वना से देखें. ये अलग बात है कि राज परिवार का सदस्य होने से आज भी जनता में एक अलग किस्म का सम्मान मिलता है. लेकिन इस भाव को बनाए रखने के लिए हमें अ पने व्यवहार को काफ़ी हद तक मर्यादित रख ना पड़ता है." ऐसे ही एक राजपरि वार से जुड़े एक युवा अपने व्यव हार को जनता के सामने बेहतर तरीके से पेश करने के लिए पर्सनैलिटी डेवलपमेंट की बाका यदा ट्रेनिंग ले चुके हैं. नाम न बताने की शर्त पर वे कहते हैं कि पहना वे में सिर्फ कुर्ता-पाय ज़ामा पहनना, लोगों से हाथ मिलाकर उनसे गले लगने तक की कला, ये स ब बदलाव उन्हें याद रखने पड़ते हैं. ऐसा नहीं है कि सिर्फ छोटे राजघराने या ज़मींदा र ही खुद को बदल रहे हों, बल्कि बड़े नेता भी जनता के मन में हो रहे बदलाव को भांप रहे हैं...